श्रध्दांजलि-सजीत कुमार और प्यारे मोहन सहाय को
भोजपुरी फिल्मों केदो बड़े चेहरे अचानक हमसे दूर हो गए सजीत कुमार और प्यारे मोहन सहाय। ये दोनों चेहरे पुरानी पीढ़ी के भव्य स्तंभ थे। सुजीत कुमार ने भोजपुरी सिनेमा को समृध्द बनाने में हर संभव योगदान किया और उन्होंने एक से एक हिट और सार्थक फिल्में दीं।
‘बिदेसिया’, ‘दंगल’, ‘सजनवा बैरी भईले हमार’, ‘गंगा जइसन भौजी हमार’, ‘हमार भौजी’,'गंगा कहे पुकार के’, ‘कब होइहे गवनवा हमार’, ‘सईंया से भइले मिलनवा’, ‘आइल बसंत बहार’, सहित अनेक फिल्मों में उन्होंने अपने समर्थ अभिनय की झलक दिखाई। उन्हाेंने अपने बैनर से अमिताभ बच्चन को लेकर भी हिंदी फिल्में बनाई थीं। ‘अनुभव’,'आसमान से ऊंचा’, ‘खेल’, ‘चैंपियन’, भी उनकी फिल्में थीं। सुजीत कुमार ने बतौर एक्टर लगभग 300 फिल्मों में काम किया जिनमें वे हीरो बनकर आए। उन्होंने मुंह केकैंसर पर बड़ी वीरता से विजय पाई थी, लेकिन 75 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
प्यारे मोहन सहाय फिल्मों से ज्यादा थियेटर केप्रति समर्पित कलाकार रहे। राष्ट्रीय नाटय विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर वे मुंबई नहीं आए, बल्कि पटना चले गए और आरएमएस में नौकरी करते हुए थियेटर करते रहे। यद्यपि उन्हें ख्याति मिली भोजपुरी सिनेमा और सीरियल से। उन्होंने ‘कब होइहें गवनवा हमार’,'सच भईल सपना हमार’, सहित कई फिल्मों में काम किया। ‘दामुल’,'भष्ट्राचार’,'तहलका’, ‘मां’ जैसी फिल्मों ने उन्हें जन-जन तक पहुंचा दिया। और सबसे ज्यादा लोकप्रियता तो उन्हें ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ से मिली।’ इन दोनों अभिनेताओं की कमी महेशा महसूस होती रहेगी। ‘हमार सिनेमा’ परिवार इन्हें अपनी श्रध्दांजलि अर्पित करता है।








