जन-मजूरों, हलवाहों-चरवाहों के गायक थे- बालेश्वर यादव

Posted on 23 मार्च 2011 by admin

मेहमान का पन्ना प्रभात रंजन युवा कथाकार और समालोचक। पेशे से प्राध्यापक। जानकी पुल नाम [...]

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‘फोक’ हमारा चरित्र है, उसे चरित्रहीन मत कीजिए!

Posted on 16 फ़रवरी 2011 by admin

 माया गोविंद (कवि-गीतकार) हिंदी सिनेमा में गीतों का जो दौर था, उसका अकाल पड़ [...]

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आज नहीं तो कल हम भोजपुरी में फिल्म जरूर बनाएंगे

Posted on 06 फ़रवरी 2011 by admin

सूरज बड़जात्या मैं बहुत हैरान हूं, यह सोचकर कि भोजपुरी भाषा और संस्कृति अपनी सारी [...]

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पीछे मुड़कर देखने का समय आ गया है

Posted on 29 नवम्बर 2010 by admin

जो समाज अपनी ही विरासत या अपनी खूबियों पर गर्व नहीं कर सकता, उनके पास [...]

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मुझे गर्व है कि मैं ठेठ भोजपुरिया हूं मनोज तिवारी, हिंदी फिल्म निर्देशक

Posted on 26 अक्टूबर 2010 by admin

मैं आज यह कहने की स्थिति में हूं कि सुभाष घई ने मुझे स्वतंत्र रूप [...]

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मणिरत्नम से श्याम बेनेगल सभी भोजपुरी सिनेमा को जानना चाहते हैं

Posted on 07 अगस्त 2010 by admin

हमारी थाली भले हीरे-जवाहरात की बनी हो मगर उसमें खाना मां के हाथ का ही [...]

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भोजपुरी में ग्लोबल सिनेमा बनने का दमखम है

Posted on 26 जून 2010 by admin

मैं हिंदी फिल्मों में सिनेमेटोग्राफर हूं, भोजपुरी क्षेत्र का रहने वाला हूं, लेकिन चाहकर भी [...]

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लोक शैली के चितेरों की जय हो!

Posted on 26 जून 2010 by admin

यहां ऐसे लोगों का जिक्र करना चाहता हूं जो सही मायनों में रंगमंच का विस्तार [...]

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देर से जगे, अब तो उठो

Posted on 26 जून 2010 by admin

सोचनेवाली बात यह है कि एक विस्तृत भू-भाग में फैली भोजपुरी में फिल्मों का निर्माण [...]

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Alok

Posted on 26 जून 2010 by admin

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